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क्या सच में नोएडा बन सकता है सेमीकंडक्टर हब जापान और कोरियन कंपनियों के लिए बसाया जायेगा अलग शहर

उत्तर प्रदेश जो भारत का एक इंडस्ट्रियल बढ़ता हुआ हब है जो गुरुग्राम के बाद सबसे बड़ा उद्योग क्षेत्र माना जाता है जहां पर बड़े-बड़े स्काईस्क्रैपर्स बड़े-बड़े बिल्डिंग बड़े-बड़े उद्योगपति बड़े-बड़े कंपनियां धीरे-धीरे अपना पैर जमा रही हैं। नोएडा के अंदर देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट जेवर एयरपोर्ट बनाया जा रहा है जो काफी हाईटेक […]

नॉएडा

उत्तर प्रदेश जो भारत का एक इंडस्ट्रियल बढ़ता हुआ हब है जो गुरुग्राम के बाद सबसे बड़ा उद्योग क्षेत्र माना जाता है जहां पर बड़े-बड़े स्काईस्क्रैपर्स बड़े-बड़े बिल्डिंग बड़े-बड़े उद्योगपति बड़े-बड़े कंपनियां धीरे-धीरे अपना पैर जमा रही हैं।

नॉएडा
नॉएडा

नोएडा के अंदर देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट जेवर एयरपोर्ट बनाया जा रहा है जो काफी हाईटेक और काफी अधिक लागत में बनाया जा रहा है जिसके बाद इसके बाद वहां पर देश-विदेश से बड़े-बड़े लोगों और व्यापारियों का आवाजाही लगने लगेगा जिसको देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार जेवर एयरपोर्ट के पास एक इंडस्ट्रियल हब बन रहे हैं जिसमें जापानी और कोरियन कंपनियों के लिए कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी.

जापानी सिटी सेक्टर 5a में बनेगा जहां पर 395 हेक्टेयर जमीन को अधिग्रहण किया गया है और वही दूसरा कोरियन सिटी सेक्टर 4a में बनाया जाएगा जहां पर 365 हेक्टेयर जमीन को अधिग्रहण किया गया है,

नॉएडा:

उत्तर प्रदेश की नोएडा जो की बहुत बड़ा इंडस्ट्रियल हब है वहां पर यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास अधिग्रहण ने जापानी और कोरियन सिटी को बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है जो की जेवर एयरपोर्ट के आसपास होगा जिसके वजह से कनेक्टिविटी को और आसन बनाया जा सकता है बात करें जीर जेवर एयरपोर्ट की तो जेवर एयरपोर्ट जो की इंडिया का बहुत बड़ा एयरपोर्ट है और वहां पर काफी बड़े इंडस्ट्रियल बदलाव होने की भी संभावना है जिसको देखते हुए भूमि को चिन्हित भी कर लिया गया है और वहां पर कार्य स्टार्ट होने के इस लगाया जा रहे हैं

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शैलेंद्र भाटिया जो की एक प्रशिक्षण दिया अधिकारी हैं उनका कहना है कि 70% उद्योग के लिए और 13% कारोबारी कार्य के लिए और अन्य 10% आवासीय जरूरत को पूरा करने के लिए और बचे हुए बाकी 5% भूमि को अस्पताल स्कूल के लिए अधिग्रहित किया गया है, और बच्चे शेष 2% का अन्य विकास योजनाओं के लिए प्रयोग किया जाएगा

अब धीरे-धीरे साल की अंत से इसके कारण करना की तैयारी की जाएगी इसके बाद देखा जाएगा कि साल के कब तक जाकर यह पूरा एक सेमीकंडक्टर हब यह इलेक्ट्रिक हब बनकर तैयार होता है इससे पूरे देश के इकोनॉमिक्स में ग्रोथ होगा और देश के निर्भरता अन्य देशों पर कम होगी फिलहाल भारत जैसे देश सेमीकंडक्टर के लिए ताइवान और चीन जैसे कंपनियों पर निर्भर रहते हैं।