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Interim Budget 2024 Expectation: स्टॉक मार्केट ही नहीं रियल एस्टेट भी रिकॉर्ड हाई पर कर रहा कारोबार, चुनावी बजट में मिल सकता है बूस्टर डोज?

Interim Budget 2024 Expectation: किसी भी देश की विकास दर में रियल एस्टेट इंडस्ट्री एक बड़ी भूमिका निभाती है. जिस देश में इस सेक्टर पर संकट आता है तो उस देश की पूरी इकोनॉमी चरमरा जाती है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण चीन है, जहां बर्बाद हो चुकी रियल एस्टेट सेक्टर ने इकोनॉमी की ग्रोथ पर […]

Interim Budget 2024 Expectation: स्टॉक मार्केट ही नहीं रियल एस्टेट भी रिकॉर्ड हाई पर कर रहा कारोबार, चुनावी बजट में मिल सकता है बूस्टर डोज?

Interim Budget 2024 Expectation: किसी भी देश की विकास दर में रियल एस्टेट इंडस्ट्री एक बड़ी भूमिका निभाती है. जिस देश में इस सेक्टर पर संकट आता है तो उस देश की पूरी इकोनॉमी चरमरा जाती है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण चीन है, जहां बर्बाद हो चुकी रियल एस्टेट सेक्टर ने इकोनॉमी की ग्रोथ पर एक बड़ा फूल स्टॉप लगाने का काम किया है. भारत के मामले में यह स्थिति काफी बेहतर है.

देश में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की सेल रिपोर्ट को देखेंगे तो पता चलेगा कि 2023 में रिकॉर्ड संख्या में आवासिय फ्लैट की बिक्री हुई है. यह अब तक के किसी भी साल की तुलना में सबसे अधिक बिक्री का रिकॉर्ड है. जिस तरह पिछले साल भारतीय स्टॉक मार्केट ने रिकॉर्ड हाई पर पहुंचकर कारोबार किया था, वैसी ही स्थिति रियल स्टेट सेक्टर की भी देखी गई.

सरकारी नीतियों ने निभाई बड़ी भूमिका

नाइट फ्रैंक इंडिया के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के टॉप-8 संपत्ति बाजारों ने 2023 में 3.29 लाख से अधिक अपार्टमेंटों की वार्षिक बिक्री में 5% की वृद्धि दर्ज की है. मुंबई क्षेत्र में 2% की वृद्धि के साथ 86,871 यूनिट्स की उच्चतम बिक्री दर्ज की गई है, जबकि कोलकाता में प्रतिशत के संदर्भ में सबसे अधिक 16% की घरेलू बिक्री वृद्धि देखी गई, इसके बाद अहमदाबाद में 15% की वृद्धि और पुणे में 13% की वृद्धि हुई.

12-महीने के आवासीय मूल्य परिवर्तन के संदर्भ में हैदराबाद में 2023 में 11% की उच्चतम कीमत में उतार-चढ़ाव देखा गया. मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में से प्रत्येक में 7% की वृद्धि दर्ज की गई. एनसीआर और पुणे में क्रमशः 6% और 5% की वृद्धि देखी गई, जबकि चेन्नई और अहमदाबाद में 4% की वृद्धि देखी गई है. अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार के अंतरिम बजट में कुछ ऐसा करने वाली है, जो इस सेक्टर की अच्छी ग्रोथ को बनाए रखने में अपनी भूमिका निभा रहा हो. आइए इस सेक्टर के एक्सपर्ट से समझते हैं कि सरकार को बेहतर ग्रोथ के लिए क्या करना चाहिए.

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आसान होम लोन की जरूरत

नारेडको नेशनल के अध्यक्ष हरि बाबू कहते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में रियल एस्टेट में लगातार वृद्धि हुई है, जो तेजी से शहरीकरण, बुनियादी ढांचे में सुधार और विकास के लिए तैयार सरकारी नीतियों जैसे कारकों ने विकास में एक बड़ा योगदान दिया है. 7% की अनुमानित आर्थिक वृद्धि के साथ भारत के पास आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए एक ठोस आधार है. हरि बाबू का मानना है कि अगर सरकार बैंकों से आसान होम लोन की सुविधा शुरू करा देती है तो आने वाले समय में इसमें और तेजी देखने को मिलेगी. साथ ही होम लोन पर लगने वाले शुल्क में भी बदलाव किए जाने की आवश्यक्ता है.

डेवलपर्स को मिले GST लाभ?

91स्क्वायरफीट के को-फाउंडर अमित मिश्रा कहते हैं कि रियल एस्टेट इंडस्ट्री भारत के आर्थिक विकास में एक पिलर के रूप में खड़ा है, जो सबसे बड़े रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों में से एक के रूप में उभर रहा है. सरकार को शहरी क्षेत्रों में रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए आवंटन बढ़ाने पर विचार करना चाहिए. इसके अतिरिक्त, रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए एकीकृत जीएसटी समाधान लागू करने से उन्हें सभी निर्माण सामग्रियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने में सक्षम बनाने से न केवल संपत्ति की कीमतों में कमी आएगी, बल्कि सप्लाई चेन में पारदर्शिता भी बढ़ेगी.

इसके अलावा रियल एस्टेट डेवलपर्स और ठेकेदारों दोनों के लिए अधिक अनुकूल फाइनेंसिंग का माहौल बनाने के लिए वित्तीय संस्थानों को प्रोत्साहित करने की तत्काल आवश्यकता है. ये उपाय रियल एस्टेट परियोजनाओं में तेजी लाने और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने तेजी से काम करेंगे.

विदेशी निवेशकों पर ध्यान दे सरकार

वोमेकी ग्रुप के फाउंडर एंड चेयरमैन गौरव के सिंह कहते हैं कि रियल एस्टेट उद्योग आशावादी है और ऐसे में हम 2024-2025 के बजट के जारी होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. हमें उन नियमों से बहुत उम्मीदें हैं जो हाउसिंग का समर्थन करते हैं, स्थायी विकास को बढ़ावा देते हैं और रियल एस्टेट निवेशकों के लिए एक माहौल बनाते हैं. पहली बार घर खरीदने वालों को सशक्त बनाने के लिए, हम लॉन्ग टर्म के लिए पूंजीगत लाभ टैक्स को कम करने, दूसरे घरों पर आयकर कम करने और ब्याज सब्सिडी के लिए एक मजबूत तर्क देने का समर्थन करते हैं.

इसके अलावा, निर्माण सामग्री पर जीएसटी में थोड़ा बदलाव जैसे स्टील और सीमेंट अप्रत्यक्ष रूप से डेवलपर इनपुट कीमतों को कम करके और उसके बाद, समग्र भवन खर्च को कम करके रियल एस्टेट क्षेत्र का समर्थन कर सकते हैं.

वहीं त्रेहान आइरिस के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर अमन त्रेहान कहते हैं कि रियल्टी क्षेत्र को उम्मीद है कि आगामी केंद्रीय बजट में व्यवसाय संचालन को बढ़ाने और अधिक विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक अनुकूल नीति ढांचे की जरूरत है. ऑफिस स्पेस, रिटेल एंड मॉल डेवलपमेंट वाले कमर्शियल सेगमेंट के लिए, सरकार को समर्थन देना चाहिए. डेवलपर कम्यूनिटी आरबीआई को प्रोजेक्ट फाईनेंसिंग पर ब्याज दरों को कम करने का निर्देश देना चाहिए.

अल्फाकॉर्प के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एंड सीएफओ संतोष अग्रवाल ने कहा कि हम एक ऐसे बजट की उम्मीद कर रहे हैं, जहां रियल एस्टेट उन नीतियों के साथ प्रगति की आधारशिला के रूप में उभरता है जो सतत विकास को बढ़ावा देते हैं, इन्नोवेशन को प्रोत्साहित करते हैं और महत्वपूर्ण कर छूट के साथ हाउसिंग क्षेत्र को बढ़ावा देते हैं. भारतीय रियल एस्टेट उद्योग 2023 में कई परियोजनाओं के साथ बड़े पैमाने पर उभरा, चाहे वे रेसिडेंशियल हों कमर्शियल. कुल मिलकार सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के प्रावधानों के साथ केंद्रीय बजट का हम इंतजार कर रहे हैं.