Lal Krishna Advani को मिलेगा भारत रत्न, जानें BJP के दिग्गज नेता की जमीन से शिखर तक की यात्रा
भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता Lal Krishna Advani को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा ट्वीट करके की है. पीएम मोदी ने कहा, ‘लालकृष्ण आडवाणी हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक हैं. भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है.’ प्रधानमंत्री […]

भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता Lal Krishna Advani को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा ट्वीट करके की है. पीएम मोदी ने कहा, ‘लालकृष्ण आडवाणी हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक हैं. भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है.’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 96 साल के लालकृष्ण आडवाणी की जिंदगी प्रेरणादायक है.
उन्होंने कहा, ‘उनका जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू होकर हमारे उप-प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने तक का है. उन्होंने हमारे गृह मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में भी अपनी पहचान बनाई’.
कराची से आए बाॅम्बे
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था. 14 साल की उम्र में ही वो आरएसएस जुड़ गए थे. उनके काम को देखकर जल्द ही उन्हें कराची की शाखा का प्रेसिडेंट नियुक्त कर दिया गया. जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, तो उनका परिवार मुंबई आकर बस गया. यहां पर उन्होंने गर्वनमेंट लाॅ काॅलेज से कानून में स्नातक किया.
1951 में वो श्याम प्रसाद मुखर्जी की बनाई भारतीय जन संघ में शामिल हो गए. कुछ सालों बाद उन्हें पार्टी के दिल्ली इकाई का प्रेसिडेंट बना दिया गया. 1970 में वो पहली बार राज्यसभा पहुंचे, जहां उन्होंने चार टर्म के लिए सेवा दी. जब इंदिरा गांधी की सरकार ने 1975 में आपातकाल घोषित किया तो उनकी पार्टी भी जनता पार्टी के गठबंधन का हिस्सा बन गई. 1977 के आम चुनाव जीतने के बाद आडवाणी को सूचना और प्रसारण का मंत्रालय सौंपा गया.
भाजपा की स्थापना
सत्तारूढ़ भाजपा पार्टी की स्थापना में अटल बिहारी वाजपेयी के अलावा लालकृष्ण आडवाणी की भी अहम भूमिका थी. आडवाणी के नेतृत्व में बीजेपी राम मंदिर जन्मभूमि का राजनीतिक चेहरा बनकर उभरी थी. इसी सिलसिले में साल 1990 में निकाली उनकी राम रथ यात्रा देश के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई. अगले साल जब आम चुनाव हुए, तो भाजपा दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर सामने आई.
लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में देश के बड़े हिस्से पर भाजपा की पकड़ मजबूत हुई. इसी का नतीजा था कि भाजपा की अगुवाई वाले NDA गुट 1998 में सत्ता पर काबिज हुआ. 1999 के आम चुनाव में एक बार फिर NDA गुट ने जीत हासिल की. इस बार आडवाणी को गृह मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वो 2002 से 2005 तक उप-प्रधानमंत्री भी रहें. वो देश के इतिहास के 7वें उप-प्रधानमंत्री बने थे.
साल 2004 में जब भाजपा की हार हुई थी, तब भी आडवाणी अपनी सीट पर जीते और लोकसभा में विपक्ष के नेता बने. जब वाजपेयी ने राजनीति से हट गए, तो आडवाणी पर भाजपा को आगे ले जाने की जिम्मेदारी आई. 1991, 1998, 1999, 2004 और 2009 में वो गांधीनगर से लोकसभा सांसद चुने गए. 2014 में आखिरी लोकसभा चुनाव भी वे गांधीनगर से ही लड़े, जिसमें जीते भी.

पद्म विभूषण
भारत रत्न से पहले 2015 में आडवाणी को देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. उस साल साल पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिया गया था. तब के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी प्रोटोकॉल तोड़कर खुद उनके घर गए थे और उन्हें यह सम्मान दिया था. वाजपेयी तब 90 साल के थे और अस्वस्थ थे.
आडवाणी को भारत रत्न देने की मांग पहले भी उठी थी. भारत रत्न उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने सार्वजनिक सेवा, साहित्य, विज्ञान और कला जैसे क्षेत्रों में असाधारण काम किया हो. इस पुरस्कार की स्थापना 1954 में हुई थी. एक साल में ज्यादा से ज्यादा 3 लोगों को भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है. इस साल बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न के लिए चुना गया था.
