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Sanskrit Villages of India: भारत के वो 5 गांव जहां संस्कृत में ही बातें करते हैं लोग, दो तो कर्नाटक में हैं; देखिए…

Sanskrit Villages of India: जहां आज पूरी दुनिया अंग्रेजी के पीछे भाग रही है अपने करियर को लेकर चिंतित है और हमारे भारत में ठीक से हिंदी भी नहीं बोल पा रहे हैं आज के यंग जनरेशन के लोग वही हमारे भारत के ही कुछ ऐसे गांव है जहां पूर्ण रूप से सांस्कृतिक माहौल और […]

Sanskrit Villages of India: जहां आज पूरी दुनिया अंग्रेजी के पीछे भाग रही है अपने करियर को लेकर चिंतित है और हमारे भारत में ठीक से हिंदी भी नहीं बोल पा रहे हैं आज के यंग जनरेशन के लोग वही हमारे भारत के ही कुछ ऐसे गांव है जहां पूर्ण रूप से सांस्कृतिक माहौल और संस्कृत भाषा बोली जाती है।

जी हां आप यह सुनकर आश्चर्यचकित रह जाएंगे कि पूरा के पूरा गांव केवल और केवल संस्कृत भाषा बोलता है चाहे जो भी करना हो। उस दौर में भी भारत में ऐसी जगहें हैं जहां हिंदी या कोई क्षेत्रीय भाषा तो छोड़िए, लोग संस्कृत में बातें करते हैं। आप ये जानकर चौंक सकते हैं, लेकिन ये सच है। ये भारत के वो गांव हैं जहां की पहली भाषा (First Language) यानी आम बोलचाल की भाषा आज भी संस्कृत है। आज इस आर्टिकल में हम आपको आपके देश के ऐसे ही 5 गांवों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें Sanskrit Village के नाम से भी जाना जाता है।

1. गनोड़ा, राजस्थान (Ganoda, Rajasthan)

Ganoda, Rajasthan
Ganoda, Rajasthan

ये गांव राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में है। संस्कृत के मामले में यहां उल्टी बयार बही है। क्योंकि करीब 20 साल पहले तक यहां के लोग अपनी क्षेत्रीय भाषा में ही बातें करते थे। धीरे-धीरे संस्कृत का चलन शुरू हो गया। ऐसा तब हुआ जब यहां के स्कूलों और कॉलेजों के करिकुलम में संस्कृत को शामिल किया गया। फिर बच्चों के साथ-साथ बड़े भी संस्कृत में रुचि लेने लगे।

2. झिरी, मध्यप्रदेश (Jhiri, Madhya Pradesh)

Jhiri, Madhya Pradesh
Jhiri, Madhya Pradesh

झिरी मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां की आबादी 1000 के आसपास है और यहां की दीवारें संस्कृत में लिखे विज्ञापनों और श्लोकों से सजी हैं। पुरानी पीढ़ी अगली पीढ़ी को संस्कृत सिखाती है। शादियों में महिलाएं जो शादी के गीत गाती हैं वो भी संस्कृत में ही होते हैं। इन खूबियों ने झिरी को मध्यप्रदेश जाने वाले टूरिस्ट्स के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना दिया है।

3. सासना, ओडिशा (Sasna, Odisha)

Sasna, Odisha
Sasna, Odisha

इस गांव की आबादी कुछ 300 के आसपास है। इनमें से ज्यादातर ब्राह्मण हैं। यहां भी संस्कृत सीखना एक परंपरा है। ऐसी लोकप्रिय परंपरा, जिसका असर पड़ोस के गांव पर भी है। जहां कवि कालीदास के नाम पर एक मंदिर है।

4. होसा हल्ली, कर्नाटक (Hosa Halli, Karnataka)

Hosa Halli, Karnataka
Hosa Halli, Karnataka

ये कर्नाटक का एक गांव है। शिमोगा डिले में। कर्नाटक की भाषा कन्नड़ है। फिर भी ये राज्य का एक ऐसा खास गांव है जहां का हर एक शख्स संस्कृत बोलता है। इस गांव के स्कूल में करीब 5 हजार लोगों को संस्कृत की शिक्षा दी जाती है। इनका उद्देश्य है इस अनमोल भाषा को खत्म होने से बचाना।

5. मट्टूर, कर्नाटक (Mattur, Karnataka)

Mattur, Karnataka
Mattur, Karnataka

इसे मट्टूर का जुड़वा गांव भी कहा जाता है। टुंगा नदी के किनारे बसे इस गांव ने मट्टूर की तरह ही संस्कृत को बोलचाल की भाषा बनाकर अपनी खास पहचान बनाई हुई है। कहा जाता है कि 16वीं सदी में राजा कृष्ण देव राय ने होसा हल्ली और मट्टूर को संस्कृत को समृद्ध बनाए रखने और इसके प्रचार, प्रसार का केंद्र बनाया था।

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