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क्या होते हैं मेयर के अधिकार, किन देशों में ये सबसे ज्यादा पावरफुल?

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगड़ मेयर चुनाव के नतीजे को रद्द करते हुए आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार रहे कुलदीप सिंह को नया मेयर घोषित कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने कोर्ट के सामने झूठ बोला और खुद उन वोटों की जांच की जिन्हें रिटर्निंग ऑफिसर ने अवैध घोषित कर […]

क्या होते हैं मेयर के अधिकार, किन देशों में ये सबसे ज्यादा पावरफुल?

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगड़ मेयर चुनाव के नतीजे को रद्द करते हुए आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार रहे कुलदीप सिंह को नया मेयर घोषित कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने कोर्ट के सामने झूठ बोला और खुद उन वोटों की जांच की जिन्हें रिटर्निंग ऑफिसर ने अवैध घोषित कर दिया था. इसके बाद अपना फैसला सुनाया.पर क्या आप जानते हैं कि मेयर के क्या-क्या अधिकार हैं और किन देशों में मेयर के पास ज्यादा शक्तियां होती हैं.

भारत में गांवों के विकास के लिए ग्राम प्रधान चुने जाते हैं तो कस्बों और छोटे शहरों के लिए नगर पालिका या नगर परिषद स्थानीय निकाय के रूप में काम करती हैं. पांच लाख से ज्यादा आबादी वाले बड़े शहरों का शासन जिस स्थानीय निकाय के पास होता है, उसे नगर निगम या नगर महापालिका कहा जाता है. आमतौर पर अब नगर निगम ही प्रचलित है, जिसका मुखिया मेयर होता है, जिसे महापौर भी कहा जाता है. महापौर अपने शहर का प्रथम नागरिक माना जाता है.

चुनाव के लिए होता है दो तरीकों का इस्तेमाल

भारत में नगर निगम की शुरुआत अंग्रेजों ने साल 1688 में मद्रास (अब चेन्नई) नगर निगम के गठन के साथ की थी. बाद में बाॅम्बे (अब मुंबई) और कलकत्ता (अब कोलकाता) में भी नगर निगम की स्थापना की गई. आज अपने देश के चारों महानगर कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और दिल्ली के मेयर सबसे ज्यादा ताकतवर माने जाते हैं.

हालांकि, देश के कई राज्यों के कई बड़े शहरों के विकास का जिम्मा अब नगर निगम के पास होता है. इनके लिए बाकायदा चुनाव होता है. इस चुनाव के लिए भी दो तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है. कई नगरों में पार्षदों का चुनाव जनता करती है और वे मेयर का चुनाव करते हैं तो कई नगर निगम में पार्षदों और मेयर दोनों का ही चुनाव सीधे जनता करती है.

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अलग-अलग समय के लिए कार्यकाल

जैसे कि उत्तर प्रदेश में मेयर का चुनाव नगर निगम के सदस्यों के चुनावों के साथ सीधे होता है. ईवीएम के जरिए चुने गए पार्षदों और मेयर का कार्यकाल पांच साल का होता है. हरियाणा, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और ओडिशा में भी इसी तरह से मेयर का चुनाव प्रत्यक्ष तौर पर ही होता है. यानी इन्हें सीधे जनता चुनती है और कार्यकाल पांच साल का होता है. वहीं, बेंगलुरु (कर्नाटक) में अप्रत्यक्ष चुनाव होता है और मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है.

मुंबई में भी अप्रत्यक्ष चुनाव से जीते मेयर का कार्यकाल 2.5 साल का होता है. दिल्ली में मेयर का चुनाव अप्रत्यक्ष है और कार्यकाल पांच साल का होता है. ठीक दिल्ली की तरह ही चंडीगढ़ में भी मेयर का चुनाव पांच साल के लिए होता है.

भारत में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से चुने गए मेयर के पास अपने शहर की सरकार चलाने के लिए वैसे तो कई अधिकार होते हैं. फिर भी कई मुद्दों पर उसके अधिकार सीमित होते हैं और इसके लिए उसे राज्य सरकार का मुंह ताकना पड़ता है. वहीं, दुनिया के कई देशों में मेयर के पास असीमित अधिकार होते हैं. उन्हें अपने शहर को नियंत्रित और संचालित करने के लिए हर तरह की स्वतंत्रता होती है.

शहर सरकार चलाने वाले मेयर के पास कितने अधिकार?

मेयर ही स्थानीय नागरिक निकाय यानी नगर निगम को नियंत्रित करता है. नगर निगम से संबंधित सभी बैठकों की अध्यक्षता करता है और शहर के प्रोटोकॉल में वह सबसे ऊपर होता है. नगर निगम सदन की कार्यवाही के जरिए शहर के लिए नियम कानून-बनाने में उसकी अहम भूमिका होती है.

नगर निगम सदन में कोई भी एजेंडा मेयर की मंजूरी के बाद ही रखा जाता और नगर निगम के सभी कार्यों के लिए भी मेयर की मंजूरी जरूरी होती है. चुने गए नगर निगम प्रतिनिधियों के साथ मेयर ही नगर के विकास की योजनाएं बनवाकर लागू कराता है. पूरे शहर की आवागमन व्यवस्था, सफाई और विकास के अन्य कार्यों की योजना बनाने में उसकी अहम भूमिका होती है. मेयर के लिए नगर निगम में अलग से विकास निधि होती है, जिसे वह पूरे शहर में कहीं भी खर्च कर सकता है.

न्यूयॉर्क के मेयर के पास पुलिस की भी नियुक्ति का अधिकार

दुनिया के दूसरे देशों की बात करें तो कई शहरों के मेयर पास स्थानीय निकाय के साथ ही स्थानीय सुरक्षा का भी जिम्मा होता है. अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर को तो दुनिया का सबसे पावरफुल मेयर माना जाता है. उसके पास अपने शहर की प्रमुख एजेंसियों जैसे पुलिस और स्कूलों के लिए भी नियुक्तियों और बर्खास्तगी का अधिकार होता है.

ज्यादातर देशों में पुलिस और पढ़ाई का जिम्मा राष्ट्रीय या राज्य सरकार के पास होता है पर न्यूयॉर्क में ये दोनों अहम जिम्मेदारियों भी स्थानीय निकाय यानी नगर निगम के पास होती हैं. शहर के अन्य विकास कार्यों के लिए बजट बनाने के साथ ही न्यूयॉर्क में एक मिलियन से ज्यादा बच्चों की शिक्षा का जिम्मा मेयर के पास ही होता है तो शहर की सुरक्षा के लिए पुलिस की तैनाती भी वही करता है.अमेरिका के दूसरे शहरों के मेयर के पास भी काफी शक्तियां होती हैं.

चार साल के लिए चुनाव जाता है लंदन का मेयर

इंग्लैंड में लंदन के मेयर का चुनाव चार साल के लिए होता है. उसके पास शहर के आवागमन की व्यवस्था के साथ ही शहर के पर्यावरण को संभालने का भी जिम्मा होता है. शहर के बिजनेस को बढ़ावा देने के उपाय और पुलिसिंग की देखरेख मेयर ही करता है.

इग्लैंड की राजधानी लंदन के मेयर के पास पूरे शहर के लिए विजन तैयार करना का अधिकार होता है. इसमें कला-संस्कृति, बिजनेस और इकोनॉमी, पर्यावरण, अग्निशमन, स्वास्थ्य, घर और जमीन, प्लानिंग, स्पोर्ट और युवाओं की गतिविधियां सबकुछ शामिल हैं. उच्च शिक्षा, विदेशी निवेश के साथ-साथ लंदन में इवेंट्स और कॉन्फ्रेंस के लिए आकर्षित करने की जवाबदेही भी मेयर की ही होती है.

कनाडा के ओटावा का मेयर भी काफी शक्तिशाली होता है. वह जनसुविधाओं के लिए तो जवाबदेह होता ही है, नगर निकाय के कानूनों को लागू करवाने की जिम्मेदारी भी मेयर के पास ही होती है. इन सभी विदेशी शहरों के मेयर की शक्तियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोविड काल के दौरान जहां भारत में केंद्र और राज्य सरकारें नियम तय कर रही थीं, वहीं न्यूयॉर्क, लंदन और ओटावा जैसे शहरों में हर तरह के दिशानिर्देश मेयर ही दे रहे थे.